हर व्यक्ति धार्मिक होना चाहता है

इसीलिए वो मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे और अपने अपने धर्म स्थलों पर जाता है पर सोचने वाली बात ये है कि क्या इन धर्म स्थलों पर जाकर व्यक्ति धार्मिक हो सकता है ? पूरी दुनिया में धर्म स्थलों की भरमार है लाखो करोड़ो मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे है धार्मिक पुस्तकों की भरमार है लकिन व्यक्ति तो धार्मिक नहीं दिखाई देता।  और पूरी दुनिया में जो अशांति बढ़ रही है क्राइम बढ़ रहे है हिंसा बढ़ रही है दंगे बढ़ रहे है सबके भीतर मानसिक तनाव बढ़ रहा है चाहे कोई व्यक्ति हो या समाज , राज्य हो या देश , सभी तो अशांत है।  क्या हम कह सकते है कि हम धार्मिक है दुनिया धार्मिक है। 

अगर हमारा हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध जैन इतियादी होना ही धार्मिक है तो हमें मान लेना पड़ेगा की बुद्ध महावीर मोहम्मद जीजस नानक आदि महापुरुष धार्मिक नहीं थे क्योकि दोनों तो धार्मिक हो नहीं सकते।  या तो वो महापुरुष धार्मिक थे या हम धार्मिक है। अब इस बात का निर्णय तुम सभी अपने अपने बौद्ध द्वारा करो तो ही उत्तम है।

आज हर व्यक्ति धर्म के नाम पर कर क्या रहा है मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे के लिए लड़ रहा है अपने उसी धर्म के नाम पर मर मिटने के लिए तैयार है जान चाहे चली जाये लकिन हमारे धर्म के ऊपर कोई भी आंच नहीं आनी चाहिए।  सोचते है कि अपने उसी बने बनाये धर्म के लिए मर मिटने से उनका ईश्वर प्रसन होगा लेकिन सभी भूल में है कि अगर यही धर्म होता तो शायद आज हम सभी सुखी हो गए होते , शांत हो गए होते।  लेकिन सोचने की फुरसत किसके पास है सभी लगे है अपने अपने धर्मो का झंडा ऊपर उढ़ाने के लिए।

ध्यान से सोचो कि अगर हम सभी मिलकर इस दुनिया में एक करोड़ मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे और बना ले तो क्या तुम सोचते हो कि दुनिया धार्मिक हो जाएगी दुनिया सुखी हो जाएगी ?

एक और बात सोचो अगर दुनिया में 10 कृष्ण आये होते , 10 बुद्ध आये होते ,10 महावीर आये होते ,10 मोहममद आये होते ,10 जीजस आये होते ,10 नानक आये होते , तो क्या तुम सोचते हो आज हम सभी सब धार्मिक होते , आज हम सभी शांत होते , आज सभी बोधवान होते।

एक और दृष्टान्त देखो।  अगर हम दुनिया में करोड़ो की संख्या में धर्म ग्रन्थ और छपवा ले और सभी के घरो में बाँट दे हर घर में गीता रामायण पुराण कुरान बाइबल धमपद ग्रन्थ सभी हो दस दस की संख्या में हो तो सोचो आज जो तुम्हारे भीतर धर्मो के नाम पर दरारे है वो मिट जाती। 

नहीं ! कोई भी इस बात पर अपनी हाँ नहीं भरेगा।  लेकिन फिर भी हम ये नहीं मानते कि धर्म का पथ मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे से होकर  नहीं तुम्हारे भीतर से होकर जाता है।

आज तक तुम सभी मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे भागे जा रहे हो लेकिन हुआ तो कुछ भी नहीं। उल्टा मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे के नाम की दुकाने और बन गई और तुम गुमराह हो रहे हो।

आज से पहले भी कई बुद्ध पुरुष आये तुम्हे समझाया कि धर्म कुछ और होता है आज मै फिर वही धर्म तुम्हे सिखा रहा हूँ।

धर्म का पथ मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे से होकर नहीं धर्म शास्त्रों से होकर नहीं तुम्हारे हृदये से होकर जाता है लेकिन इस धर्म को तुम समझोगे कैसे।  कोई बुद्ध ही तुम्हे बुधतत्व के पथ पर चला सकता है।

तुम सभी ने केवल मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे को ही धर्म जान लिया है और परमात्मा को खुदा को मृत्युपर्यन्त के लिए रख छोड़ा है लेकिन मै कहता हूँ परमात्मा को खुदा को यंही इसी जीवन मै नंगी आँखों से देखा जा सकता है आज तुम्हारी आँखों मै उसे देखने की क्षमता नहीं है लेकिन किसी बुद्ध के साथ बैठोगे तो तुम्हारी भी आँखों मै उसे देखने के क्षमता आ जाएगी।

अब भी समय है अगर सुखी होना है शांत होना है तो मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे से बाहर निकलो और उस परमात्मा को कण कण मै खोज लो।  पकड़ लो उस खुदा को जर्रे जर्रे मे।  उसको मृत्यु प्रयन्त के लिए मत रख छोड़ो।  

शायद दुनिया धार्मिक हो जाये !

मनुष्य को सुखी करने के लिए कुछ भी किया जा सकता है और कुछ भी करना भी चाहिए। सारे धर्म कानून व्यवस्थाएं सभी तो मनुष्य के लिए बनाई गई। कि मनुष्य किसी भी प्रकार सुखी हो जाये। लेकिन सारा का सारा काम उल्टा हो गया। मनुष्य सुखी तो नहीं हुआ उल्टा परेशान हो गया। कोई संसार की दौड़ में परेशान है तो कोई स्वर्ग की बैकुंठ की दौड़ में। कुछ भी तो नहीं बदला।

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