His Dream The imagination of a World that is free from superstitious.

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परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है

परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है, आनंदित होना है, मस्त होना है तो यह करना ही होग। जन्मों-जन्मों बीत गए कल्पनाओं मे। 

परमात्मा दूर आकाश में है, बैकुंठ में है, गोलोक में है, स्वर्ग में है, वह लोक चिरस्थाई हैं, प्रकाशमान है।  यही कहानियां गढ़ी है ना तुमने। और इतनी गहराई से गढ़ी हैं कि वह लोक प्रकाशित हो गए और तुम्हारा लोक जहां तुम रहते हो तुम्हारी पृथ्वी अंधकारमय हो गया। वह बैकुंठ हो गया और यहां कुंठा रह गई । वह स्वर्ग हो गया और यहां नर्क रह गया । नरक तो रहेगा कुंठा ही तो रहेगी क्योंकि तुम ही ने तो मूढ़ता की है कि स्वर्ग ,बैकुंठ,  ईश्वर,  इनका लोक, पैगंबरों का लोक, तीर्थंकरों का लोक , उनका निवास कहीं दूर है । अपनी अपनी मूर्खता का तंस तुम्हें ही तो सहना पड़ेगा कोई दूसरा थोड़े ही भुकतेगा।

तुम ही तो मानते आए हो अभी तक कि तुम कल भविष्य में , किसी दूसरे लोक में, सुखी होगे और यही मानना यह दर्शाता है कि तुम आज यहां अभी दुखी ही तो हो। किसकी मूढ़ता है यह ?

छोड़ो बेकार की बातें इसी धरती को स्वर्ग बनाओ , बैकुंठ बनाओ , बुद्धौ का लोक बनाओ , पैगंबरों का जगत बना दो , तीर्थंकरों का निवास बना दो। परमात्मा को उतारो यही । अपने भीतर सिंहासन बनाओ वहां से स्वयं की मैं को हटाओ ताकि उसे आना ही पड़े। लेकिन तुम तो लगे हो धर्म के नाम पर बेकार की बातें करने।

आंखें बंद करके ध्यान करो , कल कुंडलिनी जागृत करो , कर्म को अकर्म में बदलो, सहज योग करो , जीवन जीने को सीखने जाओ,  सितार बजाकर ब्रह्म नाद सुन लो, बातें कर लो कि मनुष्य तटस्थ प्राणी है। अच्छी अच्छी बातें कर लो कि मनुष्य सीडी है देवलोक में जाने की , बातें कर लो दूसरे लोको में मृत्यु नहीं होती। बस इसी में उलझे रहो और प्रसन्न रहो और स्वयं को धार्मिक मानते रहो।

ध्यान करने के लिए ध्यान लिंगा बनाकर मूढ़ता संजो लो। सड़कों पर कृष्ण कीर्तन करते रहो। सड़कों पर बैठ कर नमाजे पढ़ते रहो। कुछ ना मिले तो आपस में ही हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई के नाम पर लड़ मारो। एक दूसरे का कत्ल करते रहो क्योंकि इन्हीं सब बातों को तो तुम धर्म कहते हो। कोई मंदिर बनाने को धार्मिक होना मानता है , कोई मस्जिद बनाने को , कोई कावड़ लाने को कोई धार्मिक होना मानता है , कोई काबा काशी जाने को धार्मिक होना मानता है। हजारों उपद्रव तुम सभी ने पाल लिए और हिंदू मुस्लिम इन्होंने पाले ? नहीं ! भूल में हो तुम। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन सभी ने पाल लिए । सभी अपनी-अपनी विचारधारा को धर्म कहने लग गए और जो इंकार करे उसके लिए हाथों में लाठी भाले तलवारे सब चीज उठा ली। उससे जबरन भी मनमाने लग गए। 

लेकिन इन सभी कृत्यों के बीच परमात्मा को भूल गए , अल्लाह को भूल गए। स्वर्ग को , जन्नत को कहीं दूर दूसरे ग्रह पर सजा सवार कर बैठ गए और अपनी ही धरती को नर्क बना दिया और तुम कहते हो मनुष्य तटस्थ है ? नहीं ! तटस्थ ! तुम और तटस्थ कैसे होगे ? कोरी कोरी कहानियां है ये। या तो तुम संसारी ही रहोगे या तुम उसकी मस्ती में पागल रहोगे या तो तुम अपने जीवन को नरक बना लोगे या स्वर्ग बल्कि यह कहना ही ठीक होगा कि अगर तुम अपने जीवन को स्वर्ग ना बना पाए तो नर्क तो वह जीवन स्वयं ही बन जाएगा । अगर अपने जीवन को बैकुंठ ना बना पाए तो कुंठा तो स्वयं ही बन जाएगा यही तो हुआ है तुम्हारे साथ । तुम परमात्मा को यहां नहीं उतार कर ला पाए इसलिए ही तो तुम्हारा लोक बिना परमात्मा के ही रह गया और परमात्मा कहीं दूर बैठ गया और जहां परमात्मा ना हो वहां सुख , शांति , आनंद , मुक्ति, हो सकती है क्या भला ?

अब बताओ ? बिना परमात्मा के तुम जहां रह रहे हो वहां तुम कैसे दावा करोगे कि वंहा सुख है , वहां शांति है , वहां धर्म है। धर्म वह भी बिना परमात्मा के ? हो सकता है क्या ? नहीं! वहां धर्म नहीं है। वहां तो हिंसा है , उपद्रव है , और अशांति है। 

इससे ज्यादा अधर्म क्या होगा कि तुम लड़ते भी हो तो भी धर्म के नाम पर। इससे ज्यादा अशांति क्या होगी कि तुम लड़ते भी हो तो भी शांति के नाम पर। जरा देखो दुनिया भर में जो भी युद्ध होते हैं फिर वह युद्ध किसी भी देश के हो। युद्ध कोई भी देश करें। एक देश दूसरे देश पर हमला करें वह यही कहता है कि हम शांति चाहते हैं हम शांति और व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं इसलिए युद्ध कर रहे है। दूसरा देश परमाणु बम ना बना ले इसलिए हम उस पर हमला कर रहे हैं स्वयं चाहे जितने मर्जी परमाणु बम पर बैठा रहे। इससे ज्यादा बुरा भी हो सकता है क्या ? लेकिन तुम सभी तो स्वयं को धार्मिक कहते हो।  तुम स्वयं गूगल करके देख लो कि दुनिया में कितने परमाणु बम है हमारी दुनिया कितनी बार तबाह हो सकती है और इतना सब कुछ करते हुए भी हम सभी स्वयं को शिक्षित , धार्मिक , पढ़ा-लिखा , उन्नत , शांतिप्रिय , और सबसे मुख्य “मनुष्य” कहते हैं।  नहीं ! कोरी कोरी मूर्खता है। 

अगर मनुष्य कभी भी धार्मिक हुआ , कभी भी जागा , कभी भी उसे होश आया , तो सबसे पहले तो वह यह करेगा कि कोई ऐसा नियम बनाया जाएगा जिससे कि कोई देश दूसरे देश के भीतर दखलअंदाजी ना करेगा कोई भी राष्ट्र है अपनी सीमा पर सेना ना खड़ी करेगा ऐसा कुछ उपाय करेगा ताकि दुनिया भर का वह पैसा जो रक्षा बजट पर व्यय होता है उसे बचाया जाए और समस्त पृथ्वी पर लगाया जाए।  ताकि इसी पृथ्वी को स्वर्ग बनाया जाए। 

जैसा तुम्हारे शास्त्रों में लिखा है कि देवता भी इस धरा पर आने को तरसते हैं उसे सत्य कर देना ही होगा। लेकिन अभी तो कोई भी देवता तुम्हारी पृथ्वी पर आने को नहीं तरसता। स्वर्ग दूर है तो यह नर्क ही तो है और तुम सभी नर्क में ही तो रह रहे हो और तुम सोचते हो नर्क से निकलकर तुम सीधा बैकुंठ चले जाओगे ?

तुम 12 क्लास तक हर क्लास में f ग्रेड ला रहे हो और तुम्हें स्कॉलरशिप मिल जाएगी ? भूल में हो तुम। पागल हो तुम। तुम ना तो तुम धार्मिक हो और ना ही जागे हुए हो। गहन मूर्छा में हो सभी। कहानियां गढ़ लो है कि भारत देव भूमी है सारे देवता यही जन्मते हैं तुम्हारी देखा देखी तुम्हारे पड़ोसी ने भी देश का नाम पाकिस्तान रख लिया पाक यानी पवित्र। बस इसी से खुश हो लो सभी। नहीं !  धर्म की कोरी बातों को छोड़ दो। कर्म अकर्म , कुंडलिनी जागरण , ध्यान , बौद्ध , स्वर्ग , बैकुंठ , साधना सिद्धि , तटस्थ प्राणी , कर्म योग , ध्यान योग , भक्ति योग , ज्ञान मार्ग , साधना मार्ग , बातें जितनी भी कर लो , सिद्धांत जितने भी बना लो , कुछ ना होगा। 

सड़क चाहे सोने की बना लो अगर उस पर गधा चलेगा तो लीद ही तो करेग। जब सोने की सड़क पर खड़ा होकर गधा मुंह खोलेगा तो रकू रेकु ही तो करेगा। 

बातें जितनी भी सुंदर सुंदर कर लो , करने वाले तुम ही तो रहोगे। तुम धर्म के नाम पर भी हिंसा करते हो राज्य राज्य के नाम पर हिंसा करते हैं देश शांति के नाम पर हिंसा करते हैं। लेकिन है तो सभी धार्मिक , है तो सभी बुद्धिमान , सभी शांति चाहते हैं ,और सभी शांति के नाम पर अशांति फैला रहे है। 

नहीं ! जब तक तुम परमात्मा को इस धरती पर नहीं उतरोगे तब तक तुम्हारे माने हुए सारे धार्मिक कार्य व्यर्थ हैं। तुम्हारा बनाया हुआ हर प्रकार का धर्म चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और दुनिया में 360 प्रकार के बने बनाए धर्म ! सभी व्यर्थ हैं। जिस प्रकार हिंदू चाहता है पूरा विश्व हिंदू हो जाए उसी प्रकार मुसलमान भी चाहता है पूरा विश्व इस्लामिक हो जाए। उसी प्रकार दुनिया के सभी 360 से ज्यादा धर्म यही तो चाहते हैं कि पूरा विश्व उन्हीं के धर्म को अपना ले लेकिन ऐसा आज तक कभी भी नहीं हुआ है है और ना ही होगा। पूरे विश्व में जैसे-जैसे मानवता आगे बढ़ेगी नई-नई विचारधाराएं आएंगी पुरानी मिट जाएंगी और वह नई विचारधाराएं स्वयं को धर्म कहेंगी। अगर तुम इतिहास उठा कर देखो तो तुम्हें ज्ञात होगा कि हर विचारधारा की उचाई कभी ना कभी हुई है एक समय था जब बुद्ध महावीर की सोच आसमान को छू रही थी , एक समय था जब इस्लाम का भी स्वर्ण युग आया था आठवीं से बाहरवीं शताब्दी तक उसी समय बगदाद में शिक्षा विज्ञान दवाई हॉस्पिटल सर्जरी स्कॉलर सभी आसमान छू रहे थे। उसी समय सूफी विचारधारा भी आसमान छू रही थी। लेकिन 1258 में मंगोल के हमले के समय जब मंगोल ने जब बगदाद को तबाह कर दिया उसके बाद इस्लाम की कमर ही टूट गई। समय बीतता गया और कई ऐसे अनपढ़ गवार शासक आए जिन्होंने इतिहास से सबक नहीं लिया इस्लाम को केवल मस्जिद और नमाज ही समझ लिया। 

जिन्होंने इस्लाम को और नीचे गिरा दिया। और आज चाहे हिंदू हो या इस्लाम सभी जमीन पर पड़े हैं छोटी-छोटी चीटियों की भांति घसीटा घसीटी में लगे हैं। मेरे धर्म का मंदिर बन जाए मेरी मस्जिद बन जाए हमारा धर्म विश्व में नंबर एक पर आ जाए।

पता नहीं तुम संसार को कहां लेकर जाओगे खैर यह तो होना ही था। जब धर्म की बागडोर मदारियों के हाथ में दोगे तो यही होगा। मदारी क्या करता है बंदर का करतब दिखाता है और लोगों से पैसे मांग कर अपना खीसा ही तो भरता है। चाहे हिंदू धर्म की बात करें या मुस्लिम की , सिख की या इसाई की , जैन की या बौद्ध की , या पारसी की। किसी की भी बात करो सभी को चलाने वाले एक से ही तो हैं। 

किसी को भी परमात्मा का साक्षात्कार नहीं हुआ है सभी मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे में भरमा रहे हैं। 

हिंदुस्तान एक अकेला ऐसा देश है जहां मुसलमान शांति से रह सकता है लेकिन दुनिया के अनेक देशों में तो यह भी संभव नहीं है और इस्लामिक देशों में ? उसमें मुसलमान को शांति से रहना संभव ही नहीं है। 

अगर किसी दिन मनुष्य जागा तो सबसे पहले तो यही होगा कि धर्मों की बागडोर मदारियों के हाथों से छीन ली जाएगी और पढ़े-लिखे लोग अपने हाथों में ले लेंगे । फिर वह पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी लोग मिलजुलकर हिंदू , मुस्लिम , सिख , इसाई सभी मिलकर एक उन्नत और विकसित समाज का , धर्म का निर्माण करेंगे।

होगा ऐसा जरूर होगा। जब ऊंचाई आती है तो नीचाई भी आती है और जब नीचाई आती है तो ऊंचाई भी आती है। जब दिन आता है तो रात भी आती है और जब रात गहरी होती जाती है तो दिन भी आता है।

मैं चाहता हूं कि कुछ लोग तो जागे , तुम तो जागो और एक-एक करके करोड़ों अरबों हो जाएंगे और एक नए समाज का निर्माण होगा जिसमें हमारे आने वाली पीढ़ियां हंसी-खुशी रह सकेंगी। धर्म का सही अर्थ समझ सकेंगी और इसी धारा को स्वर्ग बना सकेंगी।

परमात्मा की आवश्यकता स्वर्ग में नहीं जन्नत में नहीं यंही है हमारे बीच में। तुम उठो और उसे यहीं इसी धरा पर ले आओ।