परमात्मा के दर्शन कभी नहीं होते

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परमात्मा के दर्शन कभी नहीं होते परमात्मा के दर्शन कभी नहीं होते क्योंकि उसके दर्शन होने का तो तात्पर्य होता है कि एक दशक हो गया और एक दृश्य हो गया, लेकिन ऐसा होते ही तुम्हारी तो धारणा खंडित हो जाती है। क्योंकि धारणा , सिद्धांत , वह तो तुम्हारा यही था ना कि कण-कण […]

तुम प्रश्न पूछते हो? कि धार्मिक कैसे बनेंगे?

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तुम प्रश्न पूछते हो? कि धार्मिक कैसे बनेंगे? तुम प्रश्न पूछते हो? कि धार्मिक कैसे बनेंगे? बनने की कोशिश भी करते हो  लेकिन बनते नहीं! क्योंकि तुमने धर्म को समझा ही कुछ और है? तुमने धर्म के नाम पर पुस्तकें पकड़ ली। पुस्तकों में अटक गए। जीवन से कुछ भी नहीं सीखा हमेशा से ही […]

वास्तविकता में धार्मिक होने का मार्ग नास्तिकता से ही प्रारम्भ होता है।

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वास्तविकता में धार्मिक होने का मार्ग नास्तिकता से ही प्रारम्भ होता है। वास्तविकता में धार्मिक होने का मार्ग नास्तिकता से ही प्रारम्भ होता है। आस्तिक कौन है? अगर तुम मंदिर मस्जिद जाने वाले को ही आस्तिक समझते हो तो ये तुम्हारी भूल है। अगर सच्चे अर्थो में मंदिर मस्जिद जाने वाला ही आस्तिक है तो […]

परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है ?

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परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है, आनंदित होना है, मस्त होना है तो यह करना ही होग। जन्मों-जन्मों बीत गए कल्पनाओं मे।  परमात्मा दूर आकाश में है, बैकुंठ में है, गोलोक में है, स्वर्ग में है, वह […]

एक करोड़ मंदिर मस्जिद और बना कर देखो?

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एक करोड़ मंदिर मस्जिद और बना कर देखो? हर व्यक्ति धार्मिक होना चाहता है इसीलिए वो मंदिर मस्जिद गिरजे गुरुद्वारे और अपने अपने धर्म स्थलों पर जाता है पर सोचने वाली बात ये है कि क्या इन धर्म स्थलों पर जाकर व्यक्ति धार्मिक हो सकता है ? पूरी दुनिया में धर्म स्थलों की भरमार है […]

तुम अपने ही जैसे के प्रति आकर्षित होते हो।

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तुम अपने ही जैसे के प्रति आकर्षित होते हो। तुम्हारा दृष्टिकोण क्या है यह इस बात से दिख जाता है कि तुम किसके प्रति आकर्षित होते हो ‘तुम किसमे कौन सा गुण  देखते हो।  ध्यान से देखना जो धन का लोभी होगा वो उसी के प्रति आकर्षित होगा जो वैरागी  दिखता हो।  हाँ केवल दिखता […]

तुम्हे कही भी पहुंचना नहीं है।

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तुम्हे कही भी पहुंचना नहीं है। हम सब दौड़ रहे हैं परंतु क्यों? नहीं पता। और लौटता भी कौन है? और इस दौड़ का केवल रूपए की दौड़ से ही मत मान कर संतोष मत कर लेना। कि तुम तो बच गए क्योकि तुम रुपये की दौड़ में शामिल नहीं हो। लेकिन तुम रूपये की […]

क्या यही धर्म है ?

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क्या यही धर्म है ? तुम ध्यान से देखना जब एक बच्चा पैदा होता है तो तुम सभी उसे अपने अपने तथाकथित धर्म के अनुसार धार्मिक चिन्हो से अवगत कराना शुरू कर देते हो। हिन्दू परिवार अपने बच्चे को तिलक लगाता है कंठी जनेऊ पहनता है, मंदिर की मूर्तियों से अवगत करवाता है, मुस्लिम परिवार […]

यंहा अनाड़ी ही धर्म ध्वजा सँभालने का दावा करते है।

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यंहा अनाड़ी ही धर्म ध्वजा सँभालने का दावा करते है। यंहा अनाड़ी ही धर्म ध्वजा सँभालने का दावा करते है। इससे ज्यादा क्या नीचे गिरोगे तुम जंहा तुम्हे जागा हुआ मनुष्य पागल मालूम होता पड़े और धर्मो की खोल में छिपे हुए मदमस्त धार्मिक मालूम पड़े। जितने भी उसके दीवाने हुए उस अल्ल्हा की मोह्हबत […]

बैसाखी थोड़े ही चलती है लंगड़े को?

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बैसाखी थोड़े ही चलती है लंगड़े को? बैसाखी थोड़े ही चलती है लंगड़े को? तुम सोचते हो की कि बैसाखी लंगड़े को चलाती है भूल में हो तुम। लंगड़ा बैसाखी को थामता है इसलिए ही चल पाता है। आत्मा और परमात्मा में कुछ भी तो भेद नहीं है दोनों एक ही है तुमने अपने कमरे […]