His Dream The imagination of a World that is free from superstitious.

एक परम ज्ञान की अवस्था !

न मंत्र न दीक्षा ! केवल बोध !

धर्म की सर्वोच्च अवस्था !

एक जीवित धर्म !

What is the Goal of our Life?

What is the goal of our life?

What is the way to live?

Before that, we need to know what life is.

Do you think you live?

The principle you made for living a life, Does this sound like a way to live or not?

You start going to many religious teachers to learn such principles.

Still, your learning is not as good as what was expected or required, not satisfactory or adequate for you.

Happiness is still not entered in your life.

I think that apart from humans, no other creature tried to learn to live life. Did you see anyone else getting confused like this? Yes or no, “Of course not!”

What is the goal of your life?

You feel hungry, so you eat bread.

Now is there any other way to satisfy hunger?

When one start considering life goals, it is always somewhere else, it is never knows where it is, in the beginning, the goal can only mean hunger for bread. But later, it can be bliss, joy, heaven.

Because of these perception of mind, you cannot allow yourself to relax at this time. The mind keeps on connecting and going to add further…I have to achieve something, it may be a further projection of something else as a dream reflected. The whole ideology is an approach to poison your consciousness; it is a tactic to make you crazy after goals.

And don’t go on that journey, because that journey becomes a journey which is endless. You cannot distinguish, there is no need. 

There is no need to compare the ideology of thinking, and reality. If you make an effort, you will be more confused. There is no need, because everything appears in the mind as a thought. It can be real or it can be not real, but at the time anything appears in the mind it appears as an idea or in the form of thought.

What is the goal of enlightened life?

Parmatmana keeps searching the life in terms of goal, waiting to wake up someday and find everyone enlightened. Why today is tension, stress, and depression in life? Why eternity is difficult to feel and achieve? He keeps reminding everyone to forget about ego, desire and not to lose patience and don’t become an emotional fool?

Life is perfect in itself. Parmatmana says, there is no goal for life. To live life peacefully, happily, and joyful with your open eyes and open mind is enough as there is no goal for that. Life is itself a goal as there is no goal for that.

It’s a trick of your Dharma Gurus who plays a major role in your life, who always puts you in dreams of Heaven, Baikuntha, Jannat, liberation, Moksha, Mukti, Sidhashram, etc.

These teachers have already put you in a dilemma just because of that you have already forgotten what actually life is. You have forgotten the sorrow and happiness of life.

What is the authenticity in it? It is also possible that after reading the book, neither saw nor understood anything, and started influencing people by using the name of God. Giving people the temptation of liberation and heaven has led people astray.

In the World, everyone is running behind money. Someone wants to achieve the pinnacle of rank prestige. Others are searching where heaven is and how to get liberation, salvation, and mukti etc.

If you talk about Parmatmana or any Buddha who has attained to the enlightenment, who has actually found the truth, they will teach you, you don’t have to reach anywhere.

When Parmatmana has already found the {THE PARMATMA}, you don’t have to reach anywhere. No one can be happy in the future.

There is no other place called heaven, where you will go, where you will get eternal life, where you can find happiness. Whatever is happiness, you will achieve in the present. Anyone who wants to be happy, can be happy here in the present time, because now in your present time, you are all holy and innocent.

He can explain to you how to live a religious life and enjoy every moment of life in the present. If you really want to learn to live a happy life, then stop chasing foolish people, search for any Buddha who can guide you to be happy today and right now. You can get your enlightenment in this life only.

Understand today itself because as Parmatmana is available to guide you.

 

हमारे! जीवन का लक्ष्य क्या है?

जीने का मार्ग क्या है?

उससे पहले यह तो जान लो कि जीवन क्या है।  तुम सोचते हो, तुम जीते हो? उसी जीने के लिए चलने फिरने के लिए जो सिद्धांत तुमने बना लिए उसी का नाम जीवन है।   

नहीं।

लेकिन तुम तो ऐसे ही सिद्धांतों को सीखने भिन्न-भिन्न धर्म गुरुओं के पास जाते हो। लेकिन फिर भी तुम सीख कँहा पाए ? तुम सुखी कँहा हो पाए?

परमात्मनः बताते हैं की मनुष्य के अलावा किसी और जीव को जड़ चेतन पशु पक्षी पक्षी किसी और को जीवन जीना सीखने को कहीं जाते नहीं देखा। किसी और को ऐसे परेशान होते देखा क्या ?

नही।

परमात्मनः बताते हैं की जीवन का लक्ष्य क्या है? 

परमात्मनः के जीवन का क्या लक्ष्य है?

परमात्मनः को भूख लगती है परमात्मनः रोटी खा लेते हैं। अब भूख मिटाने का कोई भी लक्ष्य होता है क्या? 

कुछ कुछ भी तो नहीं।

जीवन स्वयं में एक पूर्णता है। परमात्मनः कहते हैं उसका कोई भी लक्ष्य नहीं है। परमात्मनः कहते हैं जीवन स्वयं में एक लक्ष्य है। 

जीवन को शांति से आनंद पूर्वक प्रेम पूर्वक आंखें खोले हुए जीना बस इतना ही तो काफी है और क्या लक्ष्य चाहिए तुम्हें ?

परमात्मनः बताते हैं कि यह तो तुम्हारे धर्म गुरुओं की चाल है जिन्होंने तुम्हारे सामने स्वर्ग मुक्ति बैकुंठ जन्नत इत्यादि के सपने रख दिए। और तुम्हे उलझा दिया और उसी कारण तो तुम सभी दुखी हो गए और जीवन के आनंद से दूर हो गए।

तुम्हारे सामने स्वर्ग मुक्ति बैकुंठ जन्नत इत्यादि को लक्ष्य बनाकर खड़ा कर दिया और तुम्हें उलझा दिया। तुम्हें समझा दिया कि जीवन का लक्ष्य इन सबको पाना है। 

जिन्होंने यह कहानियां गढ़ी तुम्हें पता है उनकी प्रमाणिकता क्या है?

 क्या ऐसा नहीं कि कुछ चुनिंदा लोगों ने कुछ देखा कुछ समझा और एक दुकान बनाने की तैयारी कर ली थी।

दुनिया में सभी कहीं ना कहीं पहुंचने की रेस में है। किसी को धन  तक पहुंचना है। किसी को पद प्रतिष्ठा के शिखर तक। किसी को स्वर्ग , किसी को बैकुंठ , किसी को मोक्ष , किसी को मुक्ति , किसी को जन्नत पहुंचना ही है।

लेकिन अगर परमात्मनः की बात करो लेकिन अगर अन्य बुद्धौ की बात करो जिन्होंने परमपद पाया है जिन्होंने सत्य को पाया है, वह बताते हैं की उन्हें तो कंही भी नहीं पहुंचना है।

परमात्मनः उन्होंने भी जब उस परमपद को पाया तो परमात्मनः का भी कहना यही है कि यहां कहीं भी नहीं पहुंचना है। कोई भविष्य में सुखी नहीं हो सकता है। इस जंहा से जाने के बाद कोई अन्य लोक नहीं है। जहां तुम जाओगे और जहां तुम्हें शाश्वत जीवन मिलेगा जहां तुम्हें सुख मिलेगा।

परमात्मनः कहते हैं। जो भी सुखी होता है, वह वर्तमान में ही सुखी हो सकता है। आज अभी यहीं सुखी हो सकता है। क्योंकि आज अभी तुम सभी तो पवित्र हो, तुम सभी तो निर्दोष हो।

परमात्मनः तुम्हें यही वर्तमान में जीना सिखाते हैं। अगर तुम्हें भी जीना सीखना है तो बुद्धू लोगों का पीछा छोड़ो और किसी बुद्ध को पकड़ो। जो तुम्हें यही सुखी करते हैं। इसी जीवन में आज और अभी सुखी कहते हैं

ना कोई दौड़ और न कोई उपाय। ना कहीं जाना ना कुछ पाना। 

बस तुम यही इनलाइटेड हो सकते हो। परमात्मनः तुम्हें इसी सदी के लिए धर्म दे रहे हैं। पहले के बुद्धौ का ज्ञान उस समय के लिए था। परमात्मनः तुम्हें आज अभी के लिए ही आज का जीवित धर्म समझा रहे हैं।

आज ही समझ लो क्योंकि जब तक परमात्मनः इस देह में है तभी तक तुम्हें समझा सकते हैं। परमात्मनः जो इस देह को लाँघ कर परमात्मा को उस परमपद को पा चुके हैं। इसके बाद परमात्मनः की मृत्यु नहीं महामृत्यु घटेगी। उसके बाद परमात्मनः का दोबारा जन्म नहीं होगा। फिर कोई और बुद्ध आएगा लेकिन फिर भी तुम पहचान नहीं पाओगे। जैसे तुम आज परमात्मनः को नहीं पहचान पा रहे हो। आज परमात्मनः की आखिरी देह है। इसके बाद महामृत्यु संभव है। कोई जन्म नहीं होगा। अगर तुम्हें कुछ सीखना है तो आज ही सीख लो।