क्या यही धर्म है ?

  • Post author:
  • Post published:May 12, 2021
  • Post category:Uncategorized
You are currently viewing क्या यही धर्म है ?

तुम ध्यान से देखना जब एक बच्चा पैदा होता है तो तुम सभी उसे अपने अपने तथाकथित धर्म के अनुसार धार्मिक चिन्हो से अवगत कराना शुरू कर देते हो। हिन्दू परिवार अपने बच्चे को तिलक लगाता है कंठी जनेऊ पहनता है, मंदिर की मूर्तियों से अवगत करवाता है, मुस्लिम परिवार बच्चे को मस्जिद ले जाता है धार्मिक रूप से बनाई गई मान्यता अनुसार खतना करवाते है, उसे नमाज पड़ना सिखाते है, सिख केश रखवाते है गुरूद्वारे ले जाते है, ईसाई चर्च ले जाते है, क्रॉस धारण करवाते है।

लकिन उस बच्चे से कोई भी नहीं पूछता कि वो भी कुछ चाहता है या नहीं।

में तुम्हे इन किसी भी मान्यता का विरोध नहीं कर रहा हूँ में तो तुम्हे ये समझाने का प्रयतन कर रहा हू की ये कृत्ये धर्म नहीं है, धर्म इनसे भिन्न और कुछ है।

ध्यान से देखना यही सब कुछ हुआ होगा बुद्ध, महावीर, मोहमद, जीजस, नानक के साथ भी, लेकिन बड़े होकर उन्होंने अपना मार्ग स्वयं खोजा और सफलता भी हासिल की।

अब सोचो अगर उन्होंने भी तुम्हारी तरह अपना मार्ग न खोजा होता और केवल तुम्हारी तरह ही धार्मिक होते तो क्या आज तुम बुद्ध, महावीर, मोहमद, जीजस, नानक को  तुम याद रखते ? नहीं क्योकि फिर तो वो भी बिलकुल उसी तरह की धार्मिक होते जिस तरह की धार्मिक तुम आज हो।

धार्मिक होना बिलकुल अलग बात है और हिन्दू , मुस्लिम, सिख, ईसाई होना अलग बात है।

तुम ध्यान से स्वयम को देखना हिन्दू सुबह शाम मंदिर जाता है या घर में प्रार्थना करता है और पूरा दिन वो ही कार्य करता है जिससे उसके अहंकार की तृप्ति होती है। मुस्लिम 5 वक़्त की नमाज पड़ता है और बाकि का शेष दिन अपने अहंकार को बढ़ाने का प्रयत्न करता है।

सिख रविवार को गुरूद्वारे में सेवा करता है और बाकि दिन अपने होने को दृढ करता है। ईसाई रविवार को चर्च जाकर अपने पुराने किये हुए पापों का प्रायश्चित करता है और अगला पूरा सप्ताह पुनः वही पाप पुनः करने लग जाता है जिससे उसे अगले रविवार को पुनः जाकर पाप छम्य कराने की विनती करनी पड़े।   

ध्यान से देखना अगर एक बार हमने जाकर अपने पापो की लिए क्षमा मांग ली तो पुनः पाप आये कहाँ से जिसके लिए जाकर पुनः क्षमा  मांगनी पड़ेगी?

यह सब सुबह शाम की धर्म, 5  वक़्त की धर्म, रविवार के धर्म ये धर्म नहीं है ये तो तुम्हारी चालबाजी है स्वयम को धोका देने की स्वयम को उस परमात्मा के सामने धार्मिक साबित करने की । लकिन ध्यान रखना परमात्मा तुम्हारी चालबाजियों में फसेगा नहीं।

ध्यान से देखना क्या जब महावीर को एक बार ज्ञान हो गया तो क्या कभी उन्हें दुबारा ज्ञान प्राप्त करने को, कभी दुबारा ध्यान के लिए पुनः जंगल में जाना पड़ा? नहीं। क्या कभी दुबारा उस धर्म को जानने सत्य को जानने दुबारा जंगल भागे? नहीं। क्योकि जिसने एक बार सत्य को जान लिया वो हमेशा के लिए धार्मिक हो गया। उसे पुनः पुनः दुबारा थोड़े ही कही जाना है। और तुम देखो स्वयम को तुम्हे मंदिर मस्जिद या अपने अपने धार्मिक सथलो पर रोज रोज जाना पड़ता है क्योकि तुम धर्म को जान ही नहीं पाए।

क्योकि जिसने एक बार उस सत्य को जान लिया उस परमात्मा को जान लिया उसको कुछ भी जानना शेष रहा ही नहीं ।

आज मुझे ये बात तुम्हे फिर से याद क्यों दिलवानी पड़ रही है

क्या में तुमसे ज्यादा अकलमंद हू? नहीं ।

क्या में तुम्हारा गुरु या सदगुरू  हू? नहीं ।

क्या में तुमसे ज्यादा पढ़ालिखा हू? नहीं ।

क्या मैने कोई सिद्धि या साधना की हुई है? नहीं ।

तुममे और मुझमे केवल अंतर इतना ही है की मै जाग गया हू मैंने आंखे खोल ली है मैंने आंखे बंद कर अंध विश्वास करना छोड़ दिया है, तुम्हारे में और मेरे में कुछ भी तो अंतर नहीं है। जो तुम आज हो वो में कल था जो में आज हू वो तुम कल होंगे । में भी पहले वो कृत्य करता था जो तुम आज करते हो। मैंने भी पहले अपने चारो तरफ तुम्हारे तथाकथित धर्म रुपी पिंजरा बनाकर स्वयम को कैद कर रखा था।

लेकिन जैसे ही आंख खुली तो सारे मोह भंग हो गये मैने स्वयम को मुक्त पाया स्वयम को उस अस्तित्व में पाया।

इसलिए मैं कहता हूँ अभी भी समय है जागो! आंख खोलो देखो तुम कहा भागे जा रहे हो! देखो धर्म के नाम पर तुम क्या क्या पाखण्ड कर रहे हो।