Way of Enlightenment.

तुम हमेशा से ही संसार में कुछ न कुछ करे जा रहे हो इसलिए ही तुम सोचते हो कि उसको पाने के लिए भी कुछ करना ही पड़ेगा।  बस यंही गलती करते हो तुम।  तुम्हारा होना ही सिद्ध करता है कि परमात्मा है बिना उसको धारण किये तुम या कोई भी अस्तित्व में कैसे रह सकता है मैं जिस बुद्धतत्व की बात करता हूँ उसका तात्पर्य बौद्ध धर्म से नहीं है मेरी बुद्धतत्व की बात का तात्पर्य तो बिलकुल वही है जो बात कृष्ण ने गीता में प्रज्ञावान की समझाई है उसे ही मैं बुद्धतत्व के नाम से तुम्हे समझा रहा हूँ। और कुछ करके तुम प्रज्ञावान होओगे बुद्धतत्व को उपलब्ध होओगे इस भ्रम में मत रहना कुछ करने से ही तुम उससे चूके जा रहे हो।  तुम बने बनाये बुद्ध हो बस तुम्हे ज्ञात नहीं है तुम सोये सोये हो जिस दिन जाग जाओगे उसी क्षण स्वयं को पहचान जाओगे।  उस भीतर के ज्ञान के लिए कुछ भी करना नहीं है ज्ञान तो भीतर विद्यमान ही है लेकिन तुम जो ऊपर ऊपर से कचरा लाद कर बैठे हो वही तुम्हारे ज्ञान को उपलब्ध नहीं होने दे रहा है जैसे धरती में पानी तो विद्यमान ही है लेकिन ऊपर जो मिटटी पड़ीं है उसके कारण तुम्हे वो पानी दिख नहीं रहा है जैसे ही तुम मिटटी हटाते जाओगे वैसे ही पानी तुरंत प्रकट हो जायेगा।  उसी प्रकार जैसे ही तुम ऊपर से लादा हुआ कचरा हटाते हो तो तुम बुद्धतत्व को उपलब्ध हो जाते हो।

लेकिन इस भ्रम में भी मत रहना कि बुद्धतत्व को उपलब्ध होने के बाद तुम्हारे कोई 4 हाथ लग जायेंगे सिर के पीछे चक्कर लग जायेगा तुम्हे दिन में तारे नज़र आने लग जायेंगे तुम्हे भूत भविष्य नज़र आ जायेगा इतियादी। जिस दिन बुद्धतत्व घटेगा तुम्हे भी ज्ञात नहीं होगा शायद कुछ दिन बाद ही तुम्हे ज्ञात हो कि तुम्हारा संसार को देखने का नजरिया ही बदल जायेगा।  तुम्हारी दृष्टि कुछ और ही हो जाएगी तुम्हे जो पहले फूलो में भी कुछ न दीखता था वहां अब काँटों में भी तुम्हे सुंदरता दिखाई देने लग जाएगी।  जहाँ तुम्हे पहले कौए की आवाज कर्कशा सुनाई देती थी वंहा अब तुम्हे कौए की वाणी में भी वेद धवनि सुनाई देगी। शायद ये समझने में तुम्हे कुछ दिन लग जायेंगे। 

पहले जंहा तुम्हे पार्क में पक्षियों का शोर दीखता था वंहा अब तुम्हे वंही पर पक्षियों के द्वारा गाया गया ब्रम्ह्नाद सुनाई देगा।  जो तुम्हे अभी तक भ्रम था की सबकी आत्मा अलग अलग होती है वंही तुम्हे अब सभी में एक ही परमात्मा का अनुभव होने लग जायेगा।  चारों तरफ एक ही परमात्मा कण कण में झांकता दिखाई देगा।  पहले जंहा तुम केवल अपने धर्म को ही धर्म मानते थे वंहा अब तुम्हे लगेगा की उस परमात्मा को पाने के लिए किसी भी धर्म की कोई भी आवश्यकता नहीं है उल्टा ये धर्म रुपी अहंकार ही बाधा है उसको देखने मे।