Religious and Spiritual:’धार्मिक और आध्यात्मिक में क्या अंतर है’, जानें क्या कहते हैं परमात्मा

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Religious and Spiritual

एक ने पूछा परमात्मा धर्म का लोप क्यों हो रहा है ? धर्म की हानि क्यों हो रही है ? मनुष्य अशांत क्यों है ? अगर एक मनुष्य हिंसा नहीं करता तो उसके अंदर प्रेम क्यों नहीं है ? धर्म का लोप…मैं भी मानता हूं धर्म (Religious and Spiritual) का लोप हो रहा है. लेकिन कौन कर रहा है. किसके कारण हो रहा है. मैं भी मानता हूं कि मनुष्य अशांत है. लेकिन किसके कारण ? मैं भी मानता हूं कि आज का धर्म मनुष्य को सुखी और शांत नहीं कर पा रहा है. आखिर क्यों…जरा ध्यान से देखना. मेरे को भी ये बात पैदा होने के साथ समझ में नहीं आयी. 52 वर्ष के बाद समझ में आयी. कोई भी धर्म तुम्हारा आज की तारीख में दुनिया में ऐसा नहीं है जो धर्म…जिसे तुम धर्म कहते हो…हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन जो परमात्मा विरोधी ना हो.

धर्म वो भी परमात्मा विरोधी (Religious and Spiritual)

सही सुना तुमने बात अटपटी लगेगी. धर्म वो भी परमात्मा विरोधी. धर्म वो भी ईश्वर विरोधी…ध्यान से देखना तुम्हारे सभी के धर्म ईश्वर विरोधी हैं. ईश्वर क्या करता है ? परमात्मा क्या कर रहा है ? परमात्मा चाह क्या रहा है तुमसे ? परमात्मा ने सृष्टि बसायी. करोड़ों ग्रह…करोड़ों जीव-जंतु…मनुष्य, नदी, झरने और धर्म तुम्हारे क्या कर रहे हैं. धर्म तुम्हें ये सिखा रहे हैं कि किस प्रकार ऐसे ऐसे काम करो….कि इस दुनिया में दोबारा ना आना पड़े. यानी जो परमात्मा चाहता है उसके विपरीत…परमात्मा ने स्त्री और पुरुष बनाये. नर और मादा बनाये. मनुष्य के अलावा कोई भी काम की निंदा नहीं करता है. चाहे वो थलचर जीव हो या फिर जलचर…लेकिन मनुष्य…तुम्हारा परमात्मा वो तो ब्रह्मचारी होने के गुणगान गाते नहीं थकता…और हिंदू की बात नहीं कर रहा हूं. मैंने बोला सभी धर्म ईश्वर विरोधी है.

धर्म क्या कर रहा है’

हिंदू का धर्म…हिंदू का संन्यासी…हिंदू का महात्मा…तुम्हें शिक्षा देता है कि घर-बार छोड़ो. पत्नी को छोड़ो. जंगल में रहो..वो भी नंगे होकर…जप करो…तप करो..व्रत करो…मतलब वो तुम्हें संसार से विपरीत कर रहा है. विमुख कर रहा है. परमात्मा के बनाये हुए मार्ग से उठाकर अपने बनाये हुए मार्ग पर ले जा रहा है. यदि मुसलमान की बात करें तो उसका फकीर भी यही कर रहा है. जिन्होंने इस्लाम धर्म की स्थापना की. सिख तुम्हें अलग वेशभूषा दे रहा है. एक अलग मार्ग दे रहा हैं सांसारिक जीवन के बारे में. ईसाई नन बनाकर संसार से विमुख ले जा रहा है. बौद्ध तुम्हें संन्यासी बना रहा है. जैन तुम्हें परिवार से विमुख करके नग्न बना रहा है.

तुम पापी किसे कह रहे हो (Religious and Spiritual)

करीब सभी धर्म परमात्मा की सृष्टि की निंदा कर रहे हैं. खुदा ने खुदा की मिट्टी से खुदाई बनायी. और खुदाई में समा गया. यही सिद्धांत तो हिंदू का है. परमात्मा ने अपने ही तत्व से जगत बनाया और उसी में समा गया. तुम कहते हो ना कि मैं पापी हूं…जन्मों-जन्म का…यही तुम्हारे महात्मा तुम्हें सिखाते हैं. तुम पापी किसे कह रहे हो. अपने अंदर के जीवन को यानी परमात्मा को…मैं तुम्हारे देह के जीवन की बात नहीं कर रहा…यहां राम आये. कृष्ण आये. नानक आये. कबीर आये. कोई यहां नहीं रहा. ऐसे ही तुम भी आये हो और जाओगे ही. लेकिन जीवन कभी मिटता नहीं है. चारों ओ जीवन बिखरा हुआ है. यही जीवन तो परमात्मा है.

चारो ओर बिखरा हुआ है परमात्मा

परमात्मा चारो ओर बिखरा हुआ है जीवन के रूप में…तुम मूर्ति वाले परमात्मा को ढ़ूंढ रहे हो जो आज तक किसी को नहीं मिला. और जो मूढ़ दावा करते हैं कि उन्हें परमात्मा मिला…उनसे प्रश्न करना कि अगर गलती से तुम दूसरे धर्म में पैदा हुए होते तो क्या आज वाला परमात्मा मिलता ? उसके पास कोई जवाब नहीं होगा. आजकल सोशल मीडिया पर 20 साल के बच्चे आकर कुछ भी कह जाते हैं. तुम्हें 80 साल हो गये… राम राम जपते हनुमान चालीसा पढ़ते..तुम्हें हनुमान नजर नहीं आ रहे लेकिन वो तुम्हें हनुमान दिखा रहे हैं. उसी से पूछो अगर तुम दूसरे धर्म में पैदा हो गये होते या रसिया में पैदा हुए होते जहां का बच्चा बच्चा मानता है कि भगवान मर चुका है 1919 में…उसे हनुमान नजर नहीं आते…

सिख का वीडियो वायरल

तुम्हारे में ऐसे धर्म बना दिये गये हैं जो ईश्वर का विरोध कर रहा है. यहां से मैंने शुरू किया था. धर्म (Religious and Spiritual)अगर ईश्वर का विरोध कर रहा है तो वो धर्म ही नहीं है. अगर कट्टर होना ही धार्मिक होना है तो वो तो तुम बिना मेहनत के ही हो जाते हो. हिंदूओं को सिखाया जाता है कि हिंदू होना ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है. मुसलमान को सिखाया जाता है कि अल्लाह तभी प्रसन्न होगा जब हिंदू का कत्ल कर देगा. तभी जन्नत मिलेगी. एक सिख का वीडियो वायरल हुआ था, कोविड के समय, हथियार से उसने पुलिसवाले हाथ काट दिया था. हथियार धर्म के लिए रखी गई थी उससे हाथ थोड़े ना काटना था किसी का. ईसाई नन बना रहा है जीवन से विपरीत…बौध हो या जैन सभी का धर्म परमात्मा की निंदा कर रहा है.

महात्मा… परमात्मा का गला घोंट रहे हैं.

परमात्मा चाहती है कि सृष्टि फले-फूले. एक वृक्ष इतने बीज पैदा करता है कि पूरी दुनिया हरी-भरी हो जाती है. मनुष्य या जावनर के वीर्य में दुनियाभर के अपने जैसे मनुष्य या जीव पैदा करने की क्षमता होती है. यदि ईश्वर नहीं चाहता तो क्या जरूरत थी उसे इन चीजों को व्यर्थ करने की. जीवन आगे भागना चाहता है लेकिन तुम्हारा महात्मा इसे रोककर रखना चाहता है. ऐसा करके तुम्हारे महात्मा…. परमात्मा का गला घोंट रहे हैं. वे सृष्टि का गला घोंट रहे हैं. मैने तुम्हें कितनी बार समझाया है. मेरी बातें सुनकर तुम्हें ये लगेगा कि इसने एक ही चीज समझाई. इसे दूसरी चीज आती ही नहीं है. मैंने बताया कि जीवन को सरलता से बहने दो. जीवन तभी बहेगा जब तुम्हारा अहंकार मरेगा. लेकिन तुम अहंकार को मारना नहीं चाहते. तुम चाहते हो कि पूर्णता भी मिल जाए. तुम चाहते हो कि विराट भी समझ आ जाए और ‘मैं’ भी बचा रह जाए.

नदी से सीख लेने की जरूरत (Religious and Spiritual)

नदी लगातार बहती जाती है. उसका केवल एक ही उद्देश्य है. विराट से मिलना है…सागर से मिलना है. नदी को पता है कि सागर से मिलने के बाद उसका अस्तित्व नहीं बचेगा. गंगा हो या यमुना सब मिल जाते हैं सागर में…यही तुम्हारे साथ भी होगा. जिस दिन तुम विराट को पाओगे…सत्य मिलेगा. उस दिन तुम्हारे ‘मैं’ के चिथड़े उड़ जाएंगे. जिस दिन तुम्हारा अहंकार मरेगा. उस दिन कौन बचेगा. हिंदू या मुसलमान…जब तुम ही नहीं बचोगे तो क्या कोई धर्म बचेगा…लेकिन तुम अपने अहंकार को मिटाना नहीं चाहते. इसलिए कहता हूं कि धरती पर के सभी धर्म ईश्वर विरोधी हैं. वो ईश्वर को मिटाना चाहते हैं. सभी पत्थर की मूर्ति की पूजा कर रहे हैं. सभी धर्म में ऐसा हो रहा है…चाहे हिंदू हो या मुसलमान या कोई और धर्म…ध्यान से देखोगे तो सारे धर्म मृत वस्तु की पूजा कर रहे हैं.

कोई धर्म स्थल काम का नहीं

मैं कहता हूं कि तुम जीवन की पूजा करो. तुम जीवन को पहचानते भी हो तो खंडों में. गाय को पहचान लेते हो लेकिन कुत्ते को नहीं…कोयल और कौए के बीच अंतर रखते हो. पीपल और नीम के बीच भी यही देखने को मिलता है. धर्म तुम्हें आत्मशांति देता है. संतोष जीवन को सुखी बनाता है. कहा भी गया है कि जब आये संतोष धन…सब धन धूरी समान….लेकिन तुम धारणाओं में बांधकर धर्म (Religious and Spiritual) सिखना चाहते हो. तुम सिखोगे कैसे ? हिंदू हो या मुस्लिम…सिख हो या ईसाई…सभी अपनी धर्म की किताब पढ़ना चाहते हैं और उसी से सीखना चाहते हैं. जब तुम्हें प्यास लगेगी तो क्या गंगा ढूंढोगे…जब तुम मर रहे होगे तो वहीं से पानी पीना होगा जहां से जानवर पीते हैं. लेकिन अभी तुम देख देखकर पानी पीना चाहते हो…यानी ज्ञान लेना चाहते हो. यही किताब का असर है कि तुम्हें विराट के दर्शन नहीं हुए. जिसे विराट के दर्शन हुए उससे पूछना…वो कहेगा कि फेंक दो सब किताबें…कोई धर्म स्थल काम का नहीं क्योंकि उसे तो वो सर्वत्र नजर आ रहा है. जीवन के रूप में, विराट के रूप में, सत्य के रूप में…

विराट मूर्तियों में नहीं

तुम विराट को मूर्तियों में ढूंढ़ रहे हो. कहां से मिलेगा…धारणा एक ही है…ईश्वर कण-कण में है. कण-कण में वो जीवन के रूप में है. खुदा जर्रे-जर्रे में है यानी जीवन में है. जर्रे-जर्रे को खुदा महका रहा है यानी यहां मौजूद हर पदार्थ में अपनी-अपनी महक है…चाहे तुम खुद क्यों ना हो…सबको खुदा महका रहा है. जीव-जन्तु हो या पेड़-पौधे…अरे मस्जिद छोड़ो…जहां माथा टेकोगे. वहीं खुदा है. जहां तुम सर झुकाओ…वहीं ईश्वर है. लेकिन तुम धारणा नहीं तोड़ना चाहते…अपने अपने धर्म से बंधे रहना चाहते हो…इस समय जितने भी धर्म हैं वो पमात्मा का गला घोंट रहे हैं. तुम मेरे लेक्चर को बार-बार सुनो. मैं तुम्हें नास्तिक नहीं बना रहा हूं. मैं तुम्हें जगा रहा हूं…तुम उस खुदा को देखो…ईश्वर को देखो…नृत्य करते जीवन को देखो. हर जीव में वहीं तो किलकारी मार रहा है. नीम में उसी कड़वाहट है तो आम में उसकी मिठास है.

आज केवल इतना ही…शेष किसी और दिन…अंत में चारों तरफ बिखरे फैले परमात्मा को मेरा नमन…तुम सभी जागो…जागते रहो…