His Dream The imagination of a World that is free from superstitious.

एक परम ज्ञान की अवस्था !

न मंत्र न दीक्षा ! केवल बोध !

धर्म की सर्वोच्च अवस्था !

एक जीवित धर्म !

Why Parmatmana?

If you really want to understand who the PARMATMA is then start searching for an enlightened Buddha. Buddha who is already awake and already enlightened.

Why only Parmatmana??

Find any enlightened Buddha, not a person who is creating superstitions in the name of different religions. You need someone who is already enlightened and can teach you real religion.

Search for any enlightened Buddha who only talks about real religion. He never talks about worship, prayer etc., which only teaches you how to attain enlightenment?

If you really want to know what religion is, you need to find any enlightened Buddha who actually sees The PARMATMA, who can teach you religion, not superstition.

Because no one can teach you until it is already enlightened. So the one who is already enlightened is the one who can teach about the real PARAMATMA, you should seek the divine who is already enlightened.

 

Enlightened Parmatmana, can help you to follow the right path and the right door as he already found that path. He can hold your finger and lead you to the door of God.

 

If you think that you can achieve enlightenment by just reading books. Then you must ask your Religious Gurus who actually read the books and mug up those books did they actually find the PARAMATMA. What happened to your religious gurus they all have become parrots, but they didn’t find the real divine?

 

Parmatmana, teaches you the condition of society today is getting worst today because the only reason which is in everyone’s mind is with religion. Where superstition based religion exists, only conservative ideology remains. Some people may be with Hindu ideology, some with Muslim ideology, some with Sikh ideology, and many more. Is there anything else?

In fact, the real religion is destroyed by these religious gurus who have misled you in the name of religion. People go to their own religious gurus to be religious.

As long as the living Buddha is available before you, follow the right path from them that teaches you to be enlightened.

Paramatanam does not make you a disciple, he says to wake up and run away “Jaagja aur Bhaag ja”, “जाग जा और भाग जा” ।

Parmatmana is alive today, if you really want to become enlightened, then you have to walk on the right path.

परमात्मनः ही क्यों?

अगर परमात्मा को जानना है। तो तुम्हारे लिए एक ही मार्ग है कि तुम किसी बुद्ध को खोज लो। बुद्ध जो स्वयं जागृत हो जो स्वयं उसका दीदार कर चुका हो। जो स्वयं इनलाइटेड हो चुका हूं, कोई भी हो। 

परमात्मनः ही क्यों?

कोई भी ऐसा व्यक्ति खोज लो ।

लेकिन मंदिरों मस्जिदों वाला नहीं , गिरजे गुरुद्वारे वाला भी नहीं , नाम का  सद्गुरु भी नहीं , नाम का श्री श्री 1008 भी नहीं। केवल वही जो केवल परमात्मा की बात करता हो, केवल परमात्मा ही दिखाने की बात करता हो । ना मंत्र , न तंत्र , ना उपाए  ना पूजा , ना प्रार्थना , न  नमाजे कुछ भी तो नहीं।  केवल परमात्मा , केवल खुदा। 

अगर परमात्मा को जानना है तो किसी ऐसे बुद्ध को खोज लो जो उसे जानता हो या यूं कहें कि परमात्मा को जानने के लिए किसी जीते जागते परमात्मा को खोज लो। क्योंकि परमात्मा को उपलब्ध हुए बिना परमात्मा हुए बगैर कोई भी उस परमात्मा को नहीं जान सकता।  तो जो परमात्मा को जान चुका है जो परमात्मा हो चुका है तुम उसी को खोज लो वही तुम्हे परमात्मा को उपलब्ध करा सकता है। 

वही तुम्हें भी परमात्मा के द्वार तक ले जा सकता है जिसने अपना पथ पा लिया जिसने अपना द्वार खोज लिया। वही तुम्हारी उंगली पकड़कर तुम्हे परमात्मा के द्वार तक ले जा सकता है और आज परमात्मनः ने उस परमात्मा का द्वार खोज लिया है। वो स्वयं पंहुचे है, तुम्हें भी पहुंचाना चाह रहे है।

अगर तुम यह सोचते हो कि पुस्तके पढ़कर परमात्मा को जाना जा सकता है। तुम उसे जान लोगे , पहचान लोगे तो तुम उन पंडितों को  ही  देख लो जिन्होंने पुस्तकें पढ़ी। पुस्तके याद की है । क्या हुआ वह सभी तोते बन गए लेकिन परमात्मा को तो ना जान पाए।

परमात्मनः समझाते हैं कि आज समाज की जो हालत है जो अशांति सभी के मन में है  उसका कारण केवल एक ही है कि मनुष्य के भीतर से धर्म विलुप्त हो गया है। जहां धर्म होना चाहिए था जहां सत्य होना चाहिए था जहां परमात्मा होना चाहिए था। वहां केवल विचारधारा रह गई। किसी के भीतर हिंदू की विचारधारा किसी के भीतर मुसलमान की विचारधारा। किसी के भीतर सिख की और किसी के भीतर इस ईसाई । और कुछ भी तो नहीं?

इस धर्म के विलुप्त होने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा केवल और केवल धर्म गुरुओं की है जो कि उन्होंने लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह किया।

मनुष्य अपने अपने धर्म गुरुओं के पास जाता है धर्म प्राप्त करने के लिए लेकिन न तो धर्म मिलता है और न ही परमात्मा। बस एक विचारधारा मिल जाती है किसी को हिन्दू की , किसी को मुसलमान की , किसी को सिख की , किसी को ईसाई की और दुनिया में सेकड़ो प्रकार की विचारधाराएं है लेकिन धर्म सत्य परमात्मा खुदा अल्लाह आनंद कुछ भी तो नहीं।  

धर्म क्या है, सत्य क्या है, परमात्मा क्या है यह तो केवल कोई बुद्ध ही जान पाता है। वही बुद्ध ही तुम्हे उस तक पंहुचा पाता है और वो अपने ही मार्ग से पंहुचता है किसी और के बनाए मार्ग से नहीं। 

किसी और का बनाया हुआ मार्ग काम ही नहीं आता। अगर दूसरे का मार्ग काम आता तो तुम सभी पहुंच गए होते । करोड़ों तो उसी बने बनाये मार्ग पर चल रहे हैं। हिन्दू के मार्ग से , मुस्लिम के मार्ग से , सिख , ईसाई के मार्ग से सभी तो चल रहे है लेकिन कितने पंहुचे।

आज परमात्मनः ने एक नया द्वार खोज लिया है। परमात्मनः उस तक पहुंचे हैं। परमात्मनः ने उसे पाया है। परमात्मनः चाहते हैं कि तुम भी पंहुचो आज परमात्मनः जीवित है इसीलिए आज वह द्वार खुला है। आज परमात्मनः तुम्हारा पथ प्रदर्शन करते हुए तुम्हें वहां तक पहुंचा सकते हैं लेकिन परमात्मनः के जाते ही ये द्वार भी पुनः बंद हो जाएगा।  ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार आज पहले के सारे द्वार लगभग विलुप्त हो गए है।

ठीक उसी द्वार की तरह। जिस प्रकार पुराने बुद्धौ का द्वार बंद हो चूका है आज उन बुद्धौ की जगह संसार के बने हुए धर्मगुरुओं ने दुकानें बना ली है, लेकिन उनसे पहुंचा तो कोई भी नहीं वह केवल मार्ग रह गया। सांप चला गया लकीरे गई। कुछ भी नहीं होगा इस प्रकार। 

परमात्मनः के जाते ही पुनः यह मार्ग भी विलुप्त हो जाएगा। फिर यह मार्ग भी बिल्कुल वैसा ही हो जाएगा। जैसा आज तुम सभी का मार्ग है। लेकिन आज उन पुराने तुम्हारे मार्गों से कोई भी तो नहीं पहुंच पा रहा है ।

आज ही उस परमात्मा को जान लो क्योंकि फिर परमात्मनः के जाने के बाद भी कोई और सामने आएगा। वह परमात्मनः के नाम की नई दुकान सजायेगा मूर्ति बनाएगा। इन्हीं शब्दों के ग्रंथ बनाकर सामने रखेगा और एक नया मरा हुआ पंथ परमात्मनः के नाम का जन्म ले लेगा। लेकिन कोई भी पहुंचेगा नहीं । तो जब तक जीवित बुद्ध सामने है उसी को पकड़ लो।

फिर कोई यह कहेगा कि परमात्मनः रात स्वपन में आए और उन्होंने एक और ध्यान लिंगम बनाने का आदेश दे दिया। 15000 वर्ष पुरानी एक नई कहानी गढ़ दी जाएगी और कोई उसे बनाकर तुम्हारा धन लूटेगा। तुम्हारा समय बर्बाद करेगा। कोई एक ही थाली में दो चार व्यक्ति को खाना खिला कर अपनी दुकान बना लेगा कोई चाय समोसे खिला कर बीमारियां दूर करने की दुकान चलाएगा ।

मूर्तियां तो परमात्मनः की सब की दुकानों पर होंगी लेकिन एक भी मूर्ति में जीवंतता ना होगी। उनसे एक भी व्यक्ति ना पहुंच पाएगा क्योंकि वहां से जिंदा बुद्धत्व जा चुका होगा। जिंदा जीवित सत्य जा चुका होगा।

आज परमात्मनः जीवित है, देह में हैं। अगर तुम्हें भी सत्य को जानना है। परमात्मा को जानना है तो आज ही जान लो, आज ही पहचान लो।